“जहँ-तहँ मज्जा मांस रूचिर लखि परत बगारे |
जित- जित छिटके हाड़, सेत कहुँ, कहुँ रतनारे ||”
इस अवतरण में है-
(अ)बीभत्स रस
(ब) अद्भुत रस
(स) भयानक रस
(द) हास्य रस
केसव कहि न जाइ का कहिये |
देखत तव रचना विचित्र अति समुझि मनहिं मन रहिए ||
इस काव्य पंक्ति में है-
(अ)रौद्र रस
(ब) शांत रस
(द) अद्भुत रस
नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहि काल |
अली कली ही सौं बिंध्यौं, आगे कौन हवाल ||
प्रस्तुत पंक्तियों में कौनसा अलंकार है?
(अ)रूपक
(ब) विशेषोक्ति
(स) अन्योक्ति
(द) अतिशयोक्ति
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